पूर्व अध्यक्ष परिचय
पूर्व अध्यक्ष-परिचय
| नाम | रोशनलाल कुम्हार |
| पिता का नाम | श्री भगवानलाल जी |
| पद | राजकीय सेवा में मुंशी, कनिष्ठ लिपिक, कनिष्ठ लेखाकार, लेखाकार एवं सहायक लेखाधिकारी पदों पर सेवाएं दी गई |
| सेवा अवधि | 47 वर्ष 6 माह |
| पता | मूल निवास – 42, कुम्हारवाड़ा नायकों की मढी, उदयपुर हाल मुकाम – 41 B, प्रजापतिनगर, दक्षिणी सुंदरवास, उदयपुर |
| मोबाइल नंबर | +91 94141 56763 |
शैक्षणिक परिचय
वर्ष 1974 में कला स्नातक की डिग्री प्राप्त की गई। 1 जनवरी 1974 से सार्वजनिक निर्माण विभाग में मुंशी के पद पर कार्य प्रारंभ किया। सेवाकाल के दौरान RPSC से प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर 10 फरवरी 1978 को कनिष्ठ लिपिक एवं अगस्त 1983 से कनिष्ठ लेखाकार पद पर नियुक्त होकर 31 जुलाई 2016 को सहायक लेखाधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति पश्चात 31 जुलाई 2021 तक पेंशन विभाग में सेवाएं दी गई।
समाज में योगदान
वर्ष 1985 से 2021 तक करीब 35 वर्षों तक प्रजापति नवयुवक मंडल, दौताखेड़ा कुम्हारवाड़ा उदयपुर में कोषाध्यक्ष पद पर सेवाएं देकर समाज की बचत योजना का सफल संचालन किया।
वर्ष 1990 से 2008 तक श्रीयादे मंदिर मंडल कैलाशपुरी में सचिव पद पर सेवाएं देते हुए संगठन नेतृत्व के साथ मिलकर समाज संगठन के गठन व समाज की उन्नति, प्रगति के लिए विभिन्न नवाचार एवं योजनाएं बनाकर उनका सफल क्रियान्वयन किया। इसी अवधि में समाज में मृत्युभोज, बाल विवाह आदि कुरीतियों के समाप्ति के निर्णय, शिक्षा को प्रोत्साहन देने, बालक-बालिकाओं को पुरस्कृत करना, प्रथम सामूहिक विवाह सम्पन्न कराना, समाज संस्थान का पंजीयन कराना आदि कार्य सम्पन्न हुए। वर्ष 2008 में समाज सेवा संस्थान के पंजीयन पश्चात किसी पद विशेष पर नहीं रहते हुए भी संस्थान के सामाजिक कार्यों में पूरा सहयोग दिया।
जुलाई 2017 से समाज संस्थान के आम चुनाव में निर्वाचित होकर जुलाई 2022 तक संस्थान अध्यक्ष पद पर सेवाएं दी गई। इस अवधि में नवाचार स्वरूप प्रथम बार संस्थान अंतर्गत युवा संगठन एवं महिला संगठनों का गठन किया गया व नवगठित संगठनों के अंतर्गत तीन रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, कोविड महामारी में गांव-गांव काढ़ा वितरण एवं कोविड से बचाव हेतु जागरूक करने वेबिनार का आयोजन करवाया गया।”
इसके साथ ही संस्थान की प्रचलित गतिविधियों के सफल क्रियान्वयन का कार्य करते हुए समाज में पेरावणी प्रथा को बंद करने का निर्णय, श्रीयादे जयंती पर विशेष भोग-आरती का आयोजन, चतुर्थ सामूहिक विवाह का सफल आयोजन, प्रथम बार सामूहिक विवाह में परिणीत वधुओं व संस्थान को सरकार से अनुदान दिलवाना, निष्क्रिय हो चुके संस्थान के बैंक खातों को पुनः सक्रिय करवाना, अनुमानित 2.50 लाख की अवरुद्ध राशि उपयोग में लाना, चतुर्थ सामूहिक विवाह की बचत से पूर्व निर्मित हॉल में पांच कमरों का निर्माण व पूर्व निर्मित पांच कमरों का पुनरुद्धार कर आवास योग्य बनाना, लगभग 2.25 लाख रुपये वार्षिक मंदिर की आय सुनिश्चित करना, इसके साथ ही पूर्व कार्यकारिणी द्वारा सम्पन्न करवाए गए निर्माण कार्यों की अनुमानित 2.75 लाख की बकाया का भुगतान इस कार्यकाल की बचत से करना आदि कार्य इस अध्यक्षीय कार्यकाल में हमारी कार्यकारिणी के सदस्यों की मेहनत, लगन व सम्पूर्ण समाज के सहयोग एवं आशीर्वाद से सम्पन्न हुए।
वर्तमान में भी अपनी क्षमता अनुसार संस्थान की गतिविधियों में शामिल रहता हूं व आगे भी सक्रिय रहूंगा।
संदेश
किसी भी संगठन, संस्था, समाज की उन्नति व प्रगति के लिए सक्षम नेतृत्व अत्यावश्यक होता है। समाज के युवा, प्रौढ़ एवं वरिष्ठ बंधुओं से यही आग्रह है कि अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार समाज की उन्नति व प्रगति के लिए संस्थान के कार्यकलापों में निःस्वार्थ सेवाभाव से सहयोग करें, नवाचार लाएं एवं समाज को प्रगतिशील, पक्षपात रहित, पारदर्शी नेतृत्व देने को आगे आएं।
संगठित समाज एवं निःस्वार्थ, सेवाभावी, प्रगतिशील एवं पारदर्शी नेतृत्व समाज की उन्नति व प्रगति की प्रतिबद्धता है।

